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दिल्ली में CNG की कीमतों में फिर बड़ा उछाल, 12 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम, आम जनता पर बढ़ा बोझ

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दिल्ली में CNG की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी के बाद दर 83.09 रुपये हो गई है। 12 दिनों में चौथी बार बढ़ोतरी से ऑटो-टैक्सी चालकों और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

दिल्ली में सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी ने आम जनता की आर्थिक परेशानियों को बढ़ा दिया है। मंगलवार, 26 मई को राजधानी में सीएनजी के दाम में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद नई कीमत 83.09 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी इसलिए भी चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि पिछले सिर्फ 12 दिनों में यह चौथी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। लगातार बढ़ते दामों ने दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लाखों लोगों के मासिक बजट को सीधे तौर पर प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
सीएनजी को लंबे समय तक एक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के रूप में देखा जाता रहा है। पेट्रोल और डीजल की तुलना में यह सस्ता विकल्प माना जाता था, इसलिए बड़ी संख्या में लोगों ने ऑटो, टैक्सी और निजी वाहनों में सीएनजी को अपनाया। लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार हो रही मूल्य वृद्धि ने इस धारणा को कमजोर कर दिया है। अब स्थिति यह है कि हर कुछ दिनों में उपभोक्ताओं को गैस स्टेशन पर पहले से अधिक भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे रोजमर्रा की यात्रा का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
ताजा बढ़ोतरी से पहले दिल्ली में सीएनजी का भाव 81.09 रुपये प्रति किलो था। अब इसमें सीधे 2 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कीमत 83.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। यह बदलाव भले ही देखने में छोटा लगे, लेकिन कमर्शियल वाहन चालकों जैसे ऑटो ड्राइवर, कैब चालकों और डिलीवरी सेवाओं पर इसका बड़ा असर पड़ता है। इनकी रोजाना की कमाई का एक बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है, ऐसे में हर बार कीमत बढ़ने से उनकी बचत और मुनाफा दोनों कम हो जाते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में लाखों लोग रोजाना यात्रा के लिए सीएनजी वाहनों पर निर्भर हैं। नौकरीपेशा लोग, छात्र और छोटे व्यवसाय से जुड़े लोग सस्ते और सुविधाजनक विकल्प के तौर पर सीएनजी का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी चिंता खड़ी कर दी है। पहले जहां सीएनजी को पेट्रोल-डीजल का विकल्प मानकर लोग राहत महसूस करते थे, वहीं अब यह भी धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है।
गैस वितरण कंपनियों के अनुसार, सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतों का बढ़ना प्रमुख कारण है। वैश्विक स्तर पर गैस की मांग और आपूर्ति में असंतुलन के चलते दामों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। जब रुपये की कीमत घटती है, तो आयातित ऊर्जा संसाधनों की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और रुपये की स्थिति मजबूत नहीं होती, तो आने वाले समय में सीएनजी की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना बनी रह सकती है। इससे न केवल निजी वाहन चालकों पर बल्कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि बढ़ती लागत अंततः यात्रियों तक पहुंचती है।
ऑटो और टैक्सी यूनियनों में भी इस बढ़ोतरी को लेकर चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते ईंधन खर्च के कारण किराए में बढ़ोतरी की मांग करना मजबूरी बन सकती है, जिससे आम जनता पर दोहरी मार पड़ेगी। एक तरफ ईंधन महंगा हो रहा है और दूसरी तरफ यात्रा का किराया भी बढ़ सकता है।
दिल्ली में पहले ही महंगाई का दबाव कई क्षेत्रों में महसूस किया जा रहा है, ऐसे में सीएनजी की यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ लेकर आई है। खासकर वे लोग जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं, उनके लिए यह बदलाव सीधे बजट को प्रभावित कर रहा है।
यदि स्थिति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले समय में सीएनजी को लेकर लोगों की निर्भरता और लागत दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल उपभोक्ताओं के सामने विकल्प सीमित हैं और उन्हें बढ़ती कीमतों के बीच अपने खर्चों को संतुलित करना पड़ रहा है।

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